Chopper Crash President Honored Indian Air Force Group Captain Varun Singh Shaurya Chakra On Independence Day 2021 – Chopper Crash: हेलिकॉप्टर में सवार थे देवरिया के कैप्टन वरुण सिंह, गोरखपुर में भी उड़ा चुके हैं फाइटर प्लेन


भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह।
– फोटो : अमर उजाला।

भारतीय वायु सेना का एमआई-17V5 हेलीकॉप्टर बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर में क्रैश हो गया। इस हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 13 लोगों का निधन हो गया। हालांकि, भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह एक मात्र जवान जो इस हादसे में बच गए हैं। हालांकि वह गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है।  

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील के कन्हौली गांव के रहने वाले हैं। अपने अदम्य साहस और पराक्रम के दम पर शांतिकाल में सेना का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल कर देवरिया जिले को गर्व करने का मौका दिया है।

 

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह।
– फोटो : अमर उजाला।

उन्हें 15 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। यह अवार्ड विंग कमांडर को फ्लाइंग कंट्रोल सिस्टम खराब होने के बाद भी 10 हजार फीट की ऊंचाई से विमान की सफल लैंडिंग कराने पर दिया गया था।

 

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह।
– फोटो : अमर उजाला।

कन्हौली गांव के रहने वाले विंग कमांडर वरुण सिंह कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह के भतीजे हैं। उनके पिता कर्नल केपी सिंह भी सेना से रिटायर हो चुके हैं। छोटे भाई भी जल सेना में कार्यरत हैं।

 

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह।
– फोटो : सोशल मीडिया

वरुण ने संकट के समय बिना जान की परवाह किए अदम्य साहस का परिचय दिया। 12 अक्तूबर 2020 को वरुण लाइट कॉम्बेट एयर क्राफ्ट के साथ उड़ान पर थे। लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचते ही विमान का फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम खराब हो गया। लेकिन वरुण ने आपदा के समय धैर्य नहीं खोया।

 

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह।
– फोटो : अमर उजाला।

उन्होंने संयम का परिचय देते हुए आबादी से दूर ले जाकर विमान की सफल लैंडिंग कराई। इससे न केवल कई लोगों की जान बच गई, बल्कि विमान बर्बाद होने से बच गया। वह तेजस उड़ा रहे थे। वरुण फाइटर प्लेन पायलट हैं। वह गोरखपुर में 2007 से 2009 तक कार्यरत रह चुके हैं।

 

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