In Varanasi’s BHU, Union Minister Dr. Jitendra Singh said – Telemedicine is no longer an option but a necessity | BHU में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह बोले- टेली मेडिसिन अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है

वाराणसी20 मिनट पहले

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BHU में टेली डिजिटल हेल्थ पायलट कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद बोलते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह।

देश में 1457 लोगों के बीच एक डॉक्टर है, इसलिए टेली मेडिसिन एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, जहां डॉक्टर-मरीज का अनुपात प्रति 25 हजार लोगों पर एक डॉक्टर जितना कम है। इसलिए लोगों को कस्बों और महानगरों में स्थित डॉक्टरों से सर्वोत्तम चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए। यह बातें शुक्रवार को केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में टेली-डिजिटल हेल्थकेयर पायलट प्रोग्राम के शुभारंभ के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल स्वास्थ्य मिशन यह सुनिश्चित करने के लिए है कि स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए सुलभ, उपलब्ध और सस्ती हो। टेली मेडिसिन जैसे अभिनव स्वास्थ्य समाधान देश के हर साल 4-5 बिलियन अमेरिकी डॉलर बचा सकते हैं।

टेली डिजिटल हेल्थ पायलट कार्यक्रम का शुभारंभ करते केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह।

टेली डिजिटल हेल्थ पायलट कार्यक्रम का शुभारंभ करते केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह।

3 जिलों के 60 हजार रोगी शामिल होंगे प्रोजेक्ट में

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि टेली मेडिसिन न केवल रोगियों को अपना समय और पैसा बचाने में मदद करेगा, बल्कि ऐसे डॉक्टर भी हैं जो कॉल पर अपने रोगियों की तुरंत सहायता कर सकते हैं। साथ ही, सक्रिय रूप से बड़ी बीमारियों के रोगियों के उपचार में सक्रिय रूप से शामिल हो सकते हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि वाराणसी, गोरखपुर और मणिपुर के कामजोंग में शुरू होने वाली इस परियोजना के प्रारंभिक चरण में 60 हजार रोगियों को शामिल किया जाएगा और आने वाले वर्षों में इसे धीरे-धीरे पूरे देश में कवर किया जाएगा।

प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद (TIFAC) केंद्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त निकाय ने IIT मद्रास-प्रवर्तक फाउंडेशन टेक्नोलॉजीज और CDAC मोहाली के सहयोग से एक पायलट टेली-डायग्नोस्टिक्स परियोजना तैयार की है। यह भारतीय आबादी के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (ईएचआर) भी तैयार करेगा।

स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च में 137% की बढ़ोतरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह परियोजना दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली वंचित महिलाओं और बच्चों को सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए उन्मुख है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य क्षेत्र को बहुत उच्च प्राथमिकता दी है। इस साल के बजट में स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च में 137% की वृद्धि हुई है जो कि उद्योग की जीडीपी के 2.5%-3% की उम्मीदों के अनुरूप है।

मंत्री ने बताया कि भारत इस वित्त वर्ष में स्वास्थ्य पर 2.23 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगा, जिसमें 35 हजार करोड़ रुपए कोविड-19 के टीकों पर खर्च होंगे। बताया कि हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न स्वास्थ्य देखभाल योजनाओं जैसे पीएम आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन, आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना, आयुष्मान स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने स्वास्थ्य सुविधाओं को देश के लाखों गरीब लोगों के लिए सस्ता और सुलभ बनाया है।

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