Lakhan said – going to visit for 17 years, this happened for the first time; 30 people died | लखन बोले- 17 साल से दर्शन करने जा रहा, पहली बार ऐसा हुआ; कम से कम 30 लोगों की गई जान

शाहजहांपुर16 मिनट पहले

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जम्मू-कश्मीर में मां वैष्णो देवी के दर्शन से पहले भगदड़ मची तो लोग अपनी जान बचाने के लिए एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर भाग रहे थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 12 लोगों की भगदड़ में जान चली गई और करीब 20 लोग घायल हुए हैं। पिछले 17 साल से नए साल के पहले दिन की शुरुआत मां के दर्शन करके करने वाले लखन प्रताप सिंह अपनी जान की परवाह किए बगैर कटरा के अस्पताल पहुंच गए थे। उनका मकसद था कि कहीं इस हादसे में मरने या फिर घायल होने वाला उनकी माटी का तो नहीं है। जिस समय अस्पताल पहुंचे तो उस समय एक के बाद एक लाशें और दर्द से कराहते घायलों को लाया जा रहा था। लखन प्रताप सिंह ने आंखों देखा हाल फोन पर दैनिक भास्कर से साझा किया।

17 साल से दर्शन करने जा रहे लाखन

दरअसल, शाहजहांपुर के दुर्गा इंक्लेव कॉलोनी निवासी लखन प्रताप सिंह परिवार के साथ पिछले 17 साल से नए साल के पहले दिन की शुरुआत मां वैष्णो देवी के दर्शन करके करते हैं। लखन प्रताप सिंह ने दैनिक भास्कर से फोन पर बातचीत के दौरान आंखों देखा मंजर साझा किया। उन्होंने बताया कि हादसा रात करीब ढाई बजे के आसपास हुआ था। उस वक्त वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ हादसे वाली जगह से करीब 14 किलोमीटर नीचे कटरा में थे। हादसा होने के करीब 20 मिनट बाद उनको भगदड़ मचने की सूचना मिली।

पत्नी और बच्चों के साथ लखन प्रताप सिंह।

पत्नी और बच्चों के साथ लखन प्रताप सिंह।

तभी एक खबर आई कि हादसा बहुत बड़ा हुआ है। इसलिए 3 दिन के लिए दर्शन बंद कर दिए जाएंगे। हालांकि उन्होंने दर्शन करने की ठान ली थी। उनके साथ में कुछ ऐसे लोग थे, जो अलग-अलग राज्यों और जिलों के रहने वाले थे। हादसे की खबर सुनकर उनमें से कुछ लोग दर्शन करने से इनकार करते हुए वापस लौट गए तो कुछ ने एक या दो दिन बाद दर्शन करने का मन बनाया। हालांकि लखन प्रताप सिंह हादसे की खबर सुनकर वापस लौटने की जगह सबसे पहले कटरा के उस अस्पताल में गए, जहां पर शवों और घायलों को लाया जा रहा था।

अस्पताल में चीख-पुकार मची थी

लखन प्रताप सिंह का मकसद था कि इतने बड़े हादसे का शिकार होने वाला कहीं उनके शहर का तो नहीं है। अस्पताल पहुंचने पर हर तरफ चीख-पुकार मची थी। घायल दर्द से कराह रहे थे। कुछ देर रुकने के बाद फिर से वह अपने परिवार के पास लौट गए। सुबह 7 बजे फिर से खबर आई कि अधिकारियों ने हादसे वाली जगह का निरीक्षण कर दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को कम संख्या का ग्रूप बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं। कटरा से मां वैष्णो देवी मंदिर की दूरी करीब 14 किलोमीटर है।

एयरपोर्ट पर पत्नी के साथ लखन प्रताप सिंह।

एयरपोर्ट पर पत्नी के साथ लखन प्रताप सिंह।

मंदिर से दो किलोमीटर पहले हेलीकॉप्टर जाता है। फिर दो किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है। वह हेलीकॉप्टर से नौ बजे मां वैष्णो देवी मंदिर से करीब दो किलोमीटर पहले उतरे और तब वह उस जगह पर पहुंचे, जहां पर रात ढाई बजे हादसा हुआ था। हादसे के नौ घंटे बाद भी उस जगह से गुजरने वाले लोगों में खौफ देखा जा सकता था। लोग सहमे हुए थे। प्रशासन सख्ती बरतते हुए जल्दी-जल्दी उस जगह से श्रद्धालुओं को निकाल रहा था।

हादसे के बाद लगा था डर डर

लखन बताते हैं कि सरकारी आंकड़ा कुछ भी हो, लेकिन जो उनकी आंखों ने देखा है। उसके अनुसार करीब 30 लोगों की भगदड़ में जान चली गई है और इतने ही लोग घायल भी हुए हैं। वह पिछले 17 सालों से नए साल का पहला दिन मां वैष्णो देवी के दर्शन करने के शुरू करते हैं। इस बार भी परिवार के साथ आए हैं। हादसे के बाद डर तो लगा था, लेकिन दर्शन किए बगैर वापस लौट जाएं, ऐसा उनके दिल में एक बार भी नहीं आया।

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