Microfilm of rare 30,000 manuscripts prepared at Varanasi’s Sanskrit University; To be displayed at the 39th Convocation | संस्कृत विश्वविद्यालय की 30 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों की माइक्रो फिल्म तैयार

वाराणसी30 मिनट पहले

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वाराणसी के संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित सरस्वती भवन पुस्तकालय में बंद ग्रंथों का डिजिटल स्वरूप आज आएगा सामने। (फाइल फोटो)

आज वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह में 2 लाख से अधिक पुस्तकों, ग्रंथों और दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटल अवतार सामने आएगा। 1 लाख 6 हजार ग्रंथ और इसमें शामिल 30 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। इसमें 1134 ईस्वी में हाथ से लिखी “श्रीमद भगवद गीता’ की दुर्लभ पांडुलिपि भी है। वहीं भगवान गौतम बुद्ध द्वारा सारनाथ में दिए गए उपदेश की भी पांडुलिपियां संरक्षित की गई हैं। विश्वविद्यालय की सरस्वती भवन ग्रंथालय में काफी समय से बंद इन पांडुलिपियों में छुपे रहस्य भी अब शोधार्थियों के माध्यम से बाहर आएंगे।

दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने इन पांडुलिपियों की माइक्रोफिल्म या ई-संस्करण तैयार किया है। इसकी सॉफ्ट कॉपी संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को सौंप दी गई थी। आज कार्यक्रम में इसका अनावरण होगा। इसे डिजिटल स्वरूप देने के जिम्मा सरकार ने इंफोसिस को दिया था। पांडुलिपि संरक्षण प्रशिक्षण प्राप्त विश्वविद्यालय के 15 शोधार्थी भी इस कार्य मे शामिल थे।
जर्मनी के स्टार्च से किया गया संरक्षित
इन पांडुलिपियों को जर्मनी के स्टार्च (गेहूं के पेस्ट) से संरक्षित किया गया है। इससे इसकी लाइफ 200 साल बढ़ जाएगी। वहीं इन पर दीमक और कीड़े लगने की उम्मीद भी कम हो गई है। वहीं इस स्टार्च से पन्ने उलटने-पलटने में इन पांडुलिपियों के पन्ने फटते भी नहीं हैं। यह काम पूर 50 लाख रुपए में पूरा हुआ है।

आसान नहीं था फिजिकली पढ़ पाना
इन पांडुलिपियों को फिजिकली पढ़ना आसान नहीं था। अब ऑनलाइन हाेने से विश्वविद्यालय के शोध छात्रों को आसानी से इनका एक्सेस मिल जाएगा। यह पांडुलिपियां केवल यहां के छात्रों के लिए ही उपलब्ध रहेंगी। इनके साथ ही 2 लाख से अधिक किताबों का भी डिजिटल स्वरूप तैयार किया गया है।

7 विशेष लॉकरों में रखी गईं हैं पांडुलिपियां

सभी पुस्तकों और ग्रंथों का फोटोकॉपी और स्कैन यह डिजिटल स्वरूप प्रदान किया गया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि लाइब्रेरी के 7 विशेष लॉकरों में दुर्लभ पांडुलिपियां सहेज कर रखी गई हैं। यहां कुलपति की अनुमति मिलने के बाद ही विजिट किया जा सकता है। वहीं फोटो लेने की सख्त मनाही रहती है।

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