Report – जांच में अधिवक्ता की पिटाई की बात सच नहीं निकली


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डीएम व एसपी ने प्रेसवार्ता के माध्यम से दी जांच रिपोर्ट के संबंध में जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। एडीएम की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम की जांच में अधिवक्ता विष्णु जायसवाल की पिटाई व अभद्रता संबंधी उनके आरोप सच नहीं निकले। शनिवार को पुलिस लाइंस में जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन और पुलिस अधीक्षक डॉ. श्रीपति मिश्र ने प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। दोनों अफसरों ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अधिवक्ता के आरोप पुष्ट नहीं हुए। कमेटी ने अधिवक्ता को पक्ष रखने के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आए है। ऐेसे में इस बात का पता नहीं चल सका कि उनको चोट कैसे लगी है।
दोनों अफसरों ने बताया कि शहर के उमानगर मोहल्ला निवासी अधिवक्ता विष्णु जायसवाल ने दो दिसंबर को डीएम से शिकायत की थी कि एक दिसंबर की शाम को 6.30 बजे एसडीएम सौरभ सिंह और कोतवाल अनुज कुमार सिंह अधिवक्ता को अकारण कोतवाली उठा ले गए। जहां अभद्रता के बाद छोड़ दिया। इसी रात फिर 9.30 बजे कोतवाल और उनके हमराहियों ने शहर के सुभाष चौक से पकड़ लिया और कोतवाली ले आए। यहां पुलिस ने उनकी पिटाई की। इसके बाद दो दिसंबर की भोर में चार बजे छोड़ दिया गया। अधिवक्ता ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई, जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाई थी।
इस मामले में एडीएम वित्त एवं राजस्व नागेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में एएसपी राजेश कुमार, एएसडीएम गजेंद्र कुमार और सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सिंहासन गिरि की टीम से जांच कराई गई। कोतवाली परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच में पाया गया कि एक दिसंबर की शाम छह से दस बजे रात के मध्य में एक बार रात में 8.06 बजे पर कोतवाली निरीक्षक का वाहन प्रवेश किया। जिसमें कुछ सिपाही उतरते दिख रहे हैं। इसके बाद वाहन फिर से बाहर चला गया। इस अवधि में अधिवक्ता का कोतवाली मौजूदगी प्रमाणित नहीं हुई है। एक दिसंबर को करीब 9.39 बजे से 2 दिसंबर की भोर में चार बजे तक कोतवाली में बैठाने की बात की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इस समय उनके मोबाइल फोन का लोकेशन आवास पर रही है। जहां से बारह लोगों से उन्होंने वार्ता की। पांच लोगों से लंबी वार्ता हुई है। जिसका टेप भी एडीएम ने सुनाया है। जांच कमेटी ने शनिवार को दो बजे तक अधिवक्ता को उनके शरीर पर मौजूद चोटों और पक्ष प्रस्तुत करने के लिए बुलाया लेकिन वह नहीं आए।
मैं अधिवक्ता के साथ खड़ा हूं, अगर कोतवाली में उनकी पिटाई नहीं की गई है तो दूसरी जगह पिटाई की गई होगी। क्योंकि अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस पकड़ कर ले गई थी। उनको चोट लगी है। उनकी पिटाई करने वालों पर सख्त कार्रवाई किया जाए।
– सिंघासन गिरी, अध्यक्ष सिविल बार एसोसिएशन

डीएम व एसपी ने प्रेसवार्ता के माध्यम से दी जांच रिपोर्ट के संबंध में जानकारी

संवाद न्यूज एजेंसी

देवरिया। एडीएम की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम की जांच में अधिवक्ता विष्णु जायसवाल की पिटाई व अभद्रता संबंधी उनके आरोप सच नहीं निकले। शनिवार को पुलिस लाइंस में जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन और पुलिस अधीक्षक डॉ. श्रीपति मिश्र ने प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। दोनों अफसरों ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अधिवक्ता के आरोप पुष्ट नहीं हुए। कमेटी ने अधिवक्ता को पक्ष रखने के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आए है। ऐेसे में इस बात का पता नहीं चल सका कि उनको चोट कैसे लगी है।

दोनों अफसरों ने बताया कि शहर के उमानगर मोहल्ला निवासी अधिवक्ता विष्णु जायसवाल ने दो दिसंबर को डीएम से शिकायत की थी कि एक दिसंबर की शाम को 6.30 बजे एसडीएम सौरभ सिंह और कोतवाल अनुज कुमार सिंह अधिवक्ता को अकारण कोतवाली उठा ले गए। जहां अभद्रता के बाद छोड़ दिया। इसी रात फिर 9.30 बजे कोतवाल और उनके हमराहियों ने शहर के सुभाष चौक से पकड़ लिया और कोतवाली ले आए। यहां पुलिस ने उनकी पिटाई की। इसके बाद दो दिसंबर की भोर में चार बजे छोड़ दिया गया। अधिवक्ता ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई, जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाई थी।

इस मामले में एडीएम वित्त एवं राजस्व नागेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में एएसपी राजेश कुमार, एएसडीएम गजेंद्र कुमार और सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सिंहासन गिरि की टीम से जांच कराई गई। कोतवाली परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच में पाया गया कि एक दिसंबर की शाम छह से दस बजे रात के मध्य में एक बार रात में 8.06 बजे पर कोतवाली निरीक्षक का वाहन प्रवेश किया। जिसमें कुछ सिपाही उतरते दिख रहे हैं। इसके बाद वाहन फिर से बाहर चला गया। इस अवधि में अधिवक्ता का कोतवाली मौजूदगी प्रमाणित नहीं हुई है। एक दिसंबर को करीब 9.39 बजे से 2 दिसंबर की भोर में चार बजे तक कोतवाली में बैठाने की बात की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इस समय उनके मोबाइल फोन का लोकेशन आवास पर रही है। जहां से बारह लोगों से उन्होंने वार्ता की। पांच लोगों से लंबी वार्ता हुई है। जिसका टेप भी एडीएम ने सुनाया है। जांच कमेटी ने शनिवार को दो बजे तक अधिवक्ता को उनके शरीर पर मौजूद चोटों और पक्ष प्रस्तुत करने के लिए बुलाया लेकिन वह नहीं आए।

मैं अधिवक्ता के साथ खड़ा हूं, अगर कोतवाली में उनकी पिटाई नहीं की गई है तो दूसरी जगह पिटाई की गई होगी। क्योंकि अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस पकड़ कर ले गई थी। उनको चोट लगी है। उनकी पिटाई करने वालों पर सख्त कार्रवाई किया जाए।

– सिंघासन गिरी, अध्यक्ष सिविल बार एसोसिएशन

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