Sitting on a dharna outside the market committee, said – should be terminated as soon as possible | मंडी समिति के बाहर धरने पर बैठे, बोले- जल्द से जल्द समाप्त किया जाए

रामपुर40 मिनट पहले

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केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापसी के तुरंत बाद मंडी शुल्क लगाने को लेकर रामपुर में व्यापारी वर्ग में आक्रोश है। इसको लेकर सोमवार को व्यापारियों ने मंडी समिति पर प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की तरफ से पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया है। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि व्यापार मंडल बड़े लंबे अर्से से प्रदेश में मंडी शुल्क की समाप्ति के लिए आंदोलन कर रहा था। इसे जल्द से जल्द समाप्त किया जाए।

मंडी शुल्क की पुरानी व्यवस्था की लागू

बता दें कि 5 जून 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संपूर्ण देश से मंडियों का लाइसेंस, गेट पास और अन्य प्रावधानों को पूर्णत: समाप्त कर दिया था। जिससे आम व्यापारी को बड़ी राहत मिली एवं भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा, लेकिन कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद प्रदेश में मंडी शुल्क की पुरानी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। जिससे उद्योग जगत एवं व्यापारियों में रोष व्याप्त है।

निकटवर्ती राज्यों में मंडी शुल्क है माफ

कई राज्यों में विशेषकर निकटवर्ती राज्यों में मंडी शुल्क नहीं है। कई राज्यों में उद्योगों में छूट है और जब प्रदेश में मंडी शुल्क नहीं था तो अनेक उद्यमियों ने यहां पर अपने उद्योग स्थापित किए, जो कि अब अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

व्यापारियों की मानें तो मंडी अधिनियम में साफ लिखा है कि जिस-जिस प्रदेश में उत्पाद होगा, उस पर वहां मंडी शुल्क लगेगा, लेकिन अब देश-प्रदेश से बाहर से आने वाले चीजों पर भी मंडी शुल्क लग रहा है। जैसे कि (किराना, मेवा, सुपारी, काली मिर्च, मसाले) आदि वस्तुओं पर भी मंडी शुल्क लग जाएगा, जो कि असंवैधानिक है। मंडियों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। जितनी फीस सरकार को मिलती है, उससे कई गुना पैसा मंडी सचिव और कर्मचारी को जाता है

मंडी शुल्क समाप्त कर दिया जाए

व्यापारियों ने अनुरोध किया कि प्रदेश में मंडी शुल्क समाप्त कर दिया जाए। मंडी के अंदर कार्य करने वाले व्यापारियों को लाइसेंस जारी करके यूजर चार्ज व अन्य किसी माध्यम से आधा (0.50) प्रतिशत शुल्क लगाया जाए। मंडी की दुकानों को फ्री होल्ड कर रजिस्ट्री करा दी जाए, जिससे सरकार पर खर्च का भार नहीं पड़ेगा और राजस्व भी अर्जित होगा।

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