When the election rallies became a corona spreader in UP, when the market closure stopped important public meetings | यूपी में कोरोना स्प्रेडर बनी चुनावी रैलियों पर लगाम आखिर कब, बाजार बंदी से जरूरी

मेरठएक घंटा पहले

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मेरठ में पीएम मोदी की सभा में उमड़ी भीड़।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की चुनावी रैलियां कोरोना का रेला हैं। तमाम जिलों में रोजाना हो रही जनसभाओं, यात्राओं और रैलियों के कारण तेजी से कोरोना फैलता जा रहा है। प्रदेश में पिछले 10 दिनों में कोरोना संक्रमण लगभग दूसरी लहर के हालातों तक आ पहुंचा है। रैलियां कोरोना की घंटी बन चुकी हैं। प्रदेश में सरकार कोरोना रोकने के लिए साप्ताहिक बंदी, नाइट कर्फ्यू लागू कर चुकी है। लेकिन रैलियों पर कोई रोक नहीं हैं, जो असल में कोरोना की बड़ी स्प्रेडर बन रही हैं।

मेरठ में एक राजनीतिक यात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ में तार तार होती सामाजिक दूरी

मेरठ में एक राजनीतिक यात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ में तार तार होती सामाजिक दूरी

मेरठ में 1 दिन में 86 कोरोना मरीज
यूपी में एक दिन में कोरोना के 992 और ओमिक्रॉन के 23 नए केस मिले हैं। वहीं प्रदेश में कोरोना एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 3173 के पार हो चुकी है। इससे भी बड़ा खतरा मरीजों की बढ़ती संख्या और रिकवरी ग्राफ गिरना है। पूरे यूपी में पश्चिमी यूपी के तीन जिलों मेरठ, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में अकेले 1056 कोरोना मरीज हो चुके हैं। मेरठ में एक दिन में 86 मरीज कोरोना संक्रमित मिले हैं।

भाजपा सांसद सतपाल सिंह व अन्य नेता जनविश्वास यात्रा के दौरान

भाजपा सांसद सतपाल सिंह व अन्य नेता जनविश्वास यात्रा के दौरान

जनसभाओं, रैलियों की भीड़ से कोरोना
15 दिसंबर से जनवरी के पहले सप्ताह लगभग 20 दिनों में प्रदेश में तेजी से कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ा है। इसके बावजूद राजनीतिक दलों की जनसभाएं, चुनावी रैलियां, प्रचार यात्राएं जारी हैं। शिलान्यास, लोकार्पण के नाम पर भी चुनावी रैलियों का आयोजन कर वहां भारी भीड़ बुलाई जा रही है। मेरठ में 2 जनवरी को पीएम मोदी ने मेजर ध्यानचंद खेल विवि की आधारशिला रखी इस आयोजन में 75 हजार से अधिक भीड़ जुटाई गई। 23 दिसंबर को मेरठ में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया इसमें भारी भीड़ जुटाई गई। इससे पहले 18 दिसंबर को असद्दुीन ओवेसी की रैली में भारी भीड़ पहुंची। 7 दिसंबर को सपा, रालोद गठबंधन रैली में भीड़ उमड़ी और भगदड़ मच गई। टिकट के दावेदार वोटर को लुभाने के लिए क्षेत्र में जनसभाएं कर रहे हैं। इन सभाओं में भारी भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है। जहां न मास्क है न सामाजिक दूरी। भाजपा की जनविश्वास यात्राओं से लेकर कांग्रेस की बैठकों, रैलियों, महिला मैराथनों में हजारों की भीड़ जुटाई जा रही है। रालोद, सपा सहित हर दल में भीड़ की होड़ है यही भीड़ कोरोना का कारण बन रही है।

पीएम मोदी की सभा में 75 हजार से अधिक लोगों को बुलाने का लक्ष्य रखा गया

पीएम मोदी की सभा में 75 हजार से अधिक लोगों को बुलाने का लक्ष्य रखा गया

जनता ही नहीं मंत्रियों और बच्चों में संकमण
जनता के साथ नेताओं में भी कोरोना फैल रहा है। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, महेंद्र नाथ पांडेय, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पारिवारिक सदस्य में भी कोरोना पुष्ट हुआ है। इतना ही नहीं कोरोना की तीसरी लहर का असर बच्चों में दिखाई दे रहा है। यूपी में रोजाना मिल रहे कोरोना मरीजों में 8 साल से 15 साल के बच्चों में कोरोना संक्रमण मिल रहा है। मेरठ में सेंट मेरीज स्कूल के 6वीं कक्षा के छात्र में पहले कोरोना मिला उसके बाद पूरा परिवार पॉजिटिव आया। लखनऊ में 5 से अधिक बच्चों में कोरोना की पुष्टि हुई है।

मेरठ में ओवैसी की सभा मे उमड़ी भीड़ न किसी पर मास्क था न दूरी का पालन

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यूपी में पंचायत चुनाव से बेकाबू हुआ था कोरोना
कोरोना की दूसरी लहर के वक्त प्रदेश में जिला पंचायत का चुनाव होते ही कोरोना बेकाबू हो गया था। जिन गांवों को कोरोना छू भी नहीं सका था उन गांवों में पंचायत चुनाव के बाद तेजी से कोरोना के मरीज मिलने शुरू हुए और मौतें भी हुईं। मेरठ में एक नवनिर्वाचित महिला प्रधान की मौत कोरोना से शपथ के ठीक एक दिन पहले हो गई। कई जिला पंचायत सदस्य भी कोरोना संक्रमित हुए। केबिनेट मंत्री डॉ. संजीव बालियान के रिश्ते के भाई की मौत भी कोरोना संक्रमण से पंचायत चुनाव के बाद हो गई थी। आम जनता के साथ नेता भी तेजी से कोरोना की चपेट में आए थे और हालात बदतर होते चले गए।

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