Campaign To Revive Murda Ram Awadh In Deoria – देवरिया: मुर्दा रामअवध को जिंदा करने के लिए छिड़ी मुहिम, प्रशासन को कोस रहे लोग


संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 18 Nov 2021 03:03 PM IST

सार

रामअवध के मामले में सिस्टम की शिथिलता की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद ट्वीटर यूजर अभयनंदन ने अमर उजाला की रिपोर्ट के साथ सीएम को ट्वीट करते हुए लिखा है कि काली स्याही से सफेद सच लिखा गया है।

रामअचध को कागज में जिंदा करने की उठ रही है मांग।
– फोटो : अमर उजाला।

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देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील के कागजात में मर चुके रामअवध को न्याय दिलाने के लिए लोग आगे आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय यूजर मामले को दबाने में लगे तहसील प्रशासन के खिलाफ मुखरित होने लगे हैं। उन्होंने अमर उजाला में प्रकाशित खबर को सीएम, डीएम सहित प्रदेश के तमाम आला अधिकारियों को टैग कर ट्वीट किया है। किसान नेता शब्बीर अहमद ने रामअवध को न्याय नहीं मिलने पर तहसील में धरना देने की चेतावनी दी है।

डाला के रामअवध का मामला अमर उजाला तीन माह से उठा रहा है। पट्टीदार उन्हें लेखपाल, कानूनगो और सेक्रेटरी को मिलाकर आठ साल पहले राजस्व अभिलेख में मार चुके हैं। वह तीन साल से अपने जिंदा होने का सबूत लेकर तहसील में घूम रहे हैं। रामअवध की कहानी प्रकाशित होने के बाद डीएम ने मामले का स्वत: संज्ञान लेकर निस्तारित करने का निर्देश दिए थे।

डीएम के आदेश के चार माह बीतने के बाद भी तहसील प्रशासन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। बुधवार को रामअवध के मामले में सिस्टम की शिथिलता की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद ट्वीटर यूजर अभयनंदन ने अमर उजाला की रिपोर्ट के साथ सीएम को ट्वीट करते हुए लिखा है कि काली स्याही से सफेद सच लिखा गया है।

अधिकारियों की उदासीनता के कारण बुजुर्ग दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर हैं। फेसबुक पर अधिवक्ता कृष्णमूर्ति त्रिपाठी ने कहा कि यहां जिंदा व्यक्ति को मुर्दा करने में तनिक समय नहीं लगता उसे अब जिंदा करने में प्रशासनिक अधिकारियों को कंपकंपी आ रही है। तहसील में न्याय का सौदा हो रहा है।

दुर्गा चरण तिवारी कहते हैं कि इस राज में अधिकारी डीएम क्या, सीएम के आदेश को भी डस्टबिन में रखने की ताकत रखते हैं। शब्बीर अहमद ने कहा कि यदि प्रशासन ने एक सप्ताह में रामअवध को कागज में जिंदा नहीं किया तो तहसील में धरना-प्रदर्शन शुरू हो जाएगा।

विस्तार

देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील के कागजात में मर चुके रामअवध को न्याय दिलाने के लिए लोग आगे आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय यूजर मामले को दबाने में लगे तहसील प्रशासन के खिलाफ मुखरित होने लगे हैं। उन्होंने अमर उजाला में प्रकाशित खबर को सीएम, डीएम सहित प्रदेश के तमाम आला अधिकारियों को टैग कर ट्वीट किया है। किसान नेता शब्बीर अहमद ने रामअवध को न्याय नहीं मिलने पर तहसील में धरना देने की चेतावनी दी है।

डाला के रामअवध का मामला अमर उजाला तीन माह से उठा रहा है। पट्टीदार उन्हें लेखपाल, कानूनगो और सेक्रेटरी को मिलाकर आठ साल पहले राजस्व अभिलेख में मार चुके हैं। वह तीन साल से अपने जिंदा होने का सबूत लेकर तहसील में घूम रहे हैं। रामअवध की कहानी प्रकाशित होने के बाद डीएम ने मामले का स्वत: संज्ञान लेकर निस्तारित करने का निर्देश दिए थे।

डीएम के आदेश के चार माह बीतने के बाद भी तहसील प्रशासन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। बुधवार को रामअवध के मामले में सिस्टम की शिथिलता की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद ट्वीटर यूजर अभयनंदन ने अमर उजाला की रिपोर्ट के साथ सीएम को ट्वीट करते हुए लिखा है कि काली स्याही से सफेद सच लिखा गया है।

अधिकारियों की उदासीनता के कारण बुजुर्ग दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर हैं। फेसबुक पर अधिवक्ता कृष्णमूर्ति त्रिपाठी ने कहा कि यहां जिंदा व्यक्ति को मुर्दा करने में तनिक समय नहीं लगता उसे अब जिंदा करने में प्रशासनिक अधिकारियों को कंपकंपी आ रही है। तहसील में न्याय का सौदा हो रहा है।

दुर्गा चरण तिवारी कहते हैं कि इस राज में अधिकारी डीएम क्या, सीएम के आदेश को भी डस्टबिन में रखने की ताकत रखते हैं। शब्बीर अहमद ने कहा कि यदि प्रशासन ने एक सप्ताह में रामअवध को कागज में जिंदा नहीं किया तो तहसील में धरना-प्रदर्शन शुरू हो जाएगा।

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