Chath Parv – नहाय खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व आज से


परमार्थी पोखरे पर छठ पूजा के लिए वेदी बनाते बच्चे। संवाद
– फोटो : DEORIA

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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नहाय-खाय के साथ ही चार दिवसीय सूर्य उपासना के महापर्व की शुरूआत सोमवार से हो जाएगी। यह पर्व बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा। रविवार को दिनभर लोग घाटों की सफाई और वेदी बनाने में जुटे रहे। वहीं बाजार भी पूजन सामग्री से सज गय गया है। दुकानदारों की मानें तो बारिश से गन्ने को नुकसान हुआ है। ऐसे में यह पहले की तुलना में महंगा बिकेगा।
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक चलने वाले लोक आस्था का महापर्व सूर्य षष्ठी में अस्त होते व उदय होते सूर्य की उपासना की जाती है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार आठ नवंबर दिन सोमवार को नहाय-खाय के साथ इस पर्व की शुरुआत होगी। इस दिन मूल नक्षत्र और सुकर्मा योग है। चंद्रमा की स्थिति अपने मित्र बृहस्पति की राशि धनु पर रहेगी। इस दिन वैनायकी गणेश चतुर्थी व्रत भी है। नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ- सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत की शुरूआत होती है। नौ नवंबर को खरना, 10 नवंबर को दिन बुधवार को निर्जल उपवास रहेगा। इसी दिन अस्त होते सूर्य को विधि विधान से अर्घ्य दिया जाएगा। 11 नवंबर दिन बृहस्पतिवार को महापर्व के अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत का समापन होगा। इसी दिन व्रत का पारण भी किया जाएगा।

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देवरिया। नहाय-खाय के साथ ही चार दिवसीय सूर्य उपासना के महापर्व की शुरूआत सोमवार से हो जाएगी। यह पर्व बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा। रविवार को दिनभर लोग घाटों की सफाई और वेदी बनाने में जुटे रहे। वहीं बाजार भी पूजन सामग्री से सज गय गया है। दुकानदारों की मानें तो बारिश से गन्ने को नुकसान हुआ है। ऐसे में यह पहले की तुलना में महंगा बिकेगा।

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक चलने वाले लोक आस्था का महापर्व सूर्य षष्ठी में अस्त होते व उदय होते सूर्य की उपासना की जाती है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार आठ नवंबर दिन सोमवार को नहाय-खाय के साथ इस पर्व की शुरुआत होगी। इस दिन मूल नक्षत्र और सुकर्मा योग है। चंद्रमा की स्थिति अपने मित्र बृहस्पति की राशि धनु पर रहेगी। इस दिन वैनायकी गणेश चतुर्थी व्रत भी है। नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ- सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत की शुरूआत होती है। नौ नवंबर को खरना, 10 नवंबर को दिन बुधवार को निर्जल उपवास रहेगा। इसी दिन अस्त होते सूर्य को विधि विधान से अर्घ्य दिया जाएगा। 11 नवंबर दिन बृहस्पतिवार को महापर्व के अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत का समापन होगा। इसी दिन व्रत का पारण भी किया जाएगा।

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