Death – चिकित्सक और फार्मासिस्ट एक दूसरे पर लगा रहे आरोप


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चिकित्सक और फार्मासिस्ट एक दूसरे पर लगा रहे आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष और पिपरा वार्ड विजय सिंह की सर्पदंश से मौत के मामले में इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर और फार्मासिस्ट एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, उस दिन केंद्र के स्टॉक रजिस्टर में सर्पदंश से संबंधित 33 व इमरजेंसी वार्ड में पांच इंजेक्शन मौजूद था। उधर कोतवाल नवीन कुमार मिश्र ने बताया कि सीएचसी पहुंचकर डॉक्टर व फार्मासिस्ट का बयान दर्ज किया गया है।
परिजनों का आरोप है कि 16 अक्तूबर को सर्पदंश के कुछ ही मिनट बाद विजय सिंह को सीएचसी पर ले जाया गया। जहां इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट ने इलाज के दौरान लापरवाही की। इससे विजय की जिला अस्पताल ले जाते समय ही रास्ते में मौत हो गई। घटना के बाद से ही भाजपा नेताओं में जबरदस्त गुस्सा है। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड में तैनात स्वास्थ्यर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज करने के लिए सीएमओ को ज्ञापन सहित कोतवाली पुलिस को तहरीर दी है। मामले में सीएमओ डॉ.आलोक पांडेय ने एसीएमओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है।
शुक्रवार को इस मामले में कोतवाल ने सीएचसी पहुंचकर घटना के दिन ड्यूटी पर तैनात रहे डॉ.अजीत कुमार एवं फार्मासिस्ट मोहन तिवारी से पूछताछ की। बयान के दौरान दोनो ने एक दूसरे पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। डॉ.अजीत कुमार के अनुसार फार्मासिस्ट उनको इसके बारे में जानकारी नहीं दी थी और अपनी मर्जी से ही इलाज शुरू कर दिया था। वहीं फार्मासिस्ट मोहन तिवारी ने बताया कि सर्पदंश के मरीज के आने के बाद उन्होंने दो बार चिकित्सक के आवास पर जाकर इसकी सूचना उन्हें दी थी। उनके कहने पर ही उन्होंने दो इंजेक्शन लगाकर जिला चिकित्सालय के लिए रेफर किया था। जबकि इमरजेंसी में सर्पदंश से संबंधित पांच इंजेक्शन मौजूदा समय में थे। सीएचसी के अधीक्षक डॉ.अतुल कुमार ने बताया कि कोतवाल सीएचसी कार्यालय में पहुंचकर कुछ स्वास्थ्यकर्मियों का बयान लिए हैं।

चिकित्सक और फार्मासिस्ट एक दूसरे पर लगा रहे आरोप

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सलेमपुर। भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष और पिपरा वार्ड विजय सिंह की सर्पदंश से मौत के मामले में इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर और फार्मासिस्ट एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, उस दिन केंद्र के स्टॉक रजिस्टर में सर्पदंश से संबंधित 33 व इमरजेंसी वार्ड में पांच इंजेक्शन मौजूद था। उधर कोतवाल नवीन कुमार मिश्र ने बताया कि सीएचसी पहुंचकर डॉक्टर व फार्मासिस्ट का बयान दर्ज किया गया है।

परिजनों का आरोप है कि 16 अक्तूबर को सर्पदंश के कुछ ही मिनट बाद विजय सिंह को सीएचसी पर ले जाया गया। जहां इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट ने इलाज के दौरान लापरवाही की। इससे विजय की जिला अस्पताल ले जाते समय ही रास्ते में मौत हो गई। घटना के बाद से ही भाजपा नेताओं में जबरदस्त गुस्सा है। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड में तैनात स्वास्थ्यर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज करने के लिए सीएमओ को ज्ञापन सहित कोतवाली पुलिस को तहरीर दी है। मामले में सीएमओ डॉ.आलोक पांडेय ने एसीएमओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है।

शुक्रवार को इस मामले में कोतवाल ने सीएचसी पहुंचकर घटना के दिन ड्यूटी पर तैनात रहे डॉ.अजीत कुमार एवं फार्मासिस्ट मोहन तिवारी से पूछताछ की। बयान के दौरान दोनो ने एक दूसरे पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। डॉ.अजीत कुमार के अनुसार फार्मासिस्ट उनको इसके बारे में जानकारी नहीं दी थी और अपनी मर्जी से ही इलाज शुरू कर दिया था। वहीं फार्मासिस्ट मोहन तिवारी ने बताया कि सर्पदंश के मरीज के आने के बाद उन्होंने दो बार चिकित्सक के आवास पर जाकर इसकी सूचना उन्हें दी थी। उनके कहने पर ही उन्होंने दो इंजेक्शन लगाकर जिला चिकित्सालय के लिए रेफर किया था। जबकि इमरजेंसी में सर्पदंश से संबंधित पांच इंजेक्शन मौजूदा समय में थे। सीएचसी के अधीक्षक डॉ.अतुल कुमार ने बताया कि कोतवाल सीएचसी कार्यालय में पहुंचकर कुछ स्वास्थ्यकर्मियों का बयान लिए हैं।

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