“Deoria 24 News” By defeating 7 young candidates, a 65-year-old old woman won the Panchayat elections to win the victory, providing education to the poor children of the village. | 7 युवा प्रत्याशियों को मात देकर 65 वर्षीय वृद्ध महिला ने पंचायत चुनाव में लहराया जीत का परचम, गांव के गरीब बच्चों को दिलवाती थीं अध्यापकों से शिक्षा

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आजमगढ़10 मिनट पहले

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जीत के बाद प्रसन्न मुद्रा में � - Dainik Bhaskar

जीत के बाद प्रसन्न मुद्रा में �

उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए त्रिस्तरीय चुनाव में जहां प्रत्याशियों की होड़ लगी रही वहीं आजमगढ़ जिले में एक 65 वर्षीय वृद्ध महिला ने जीत का परचम लहरा कर सबको चौंका दिया। इस महिला ने 7 युवा प्रत्याशियों को मात देकर 43 वोटों से अपना परचम लहराया। जीत के बाद महिलरा ने कहा कि वह बराबर गांव के लोगों की सेवाएं करती थी। अब जनता ने उन्हें मौका दिया है तो वह और भी बेहतर तरीके से जनता की सेवा करेंगी।

जानकारी के अनुसार, आजमगढ़ जिले केठेकमा ब्लॉक के पसिका गांव की रहने वाली 65 वर्षीय फूलमती सरोज पत्नी स्वर्गीय मोनई सरोज की शुरू से ही सोच थी कि वह अपने गांव के लोगों का विकास करें और वह अपने स्तर से जो भी संभव मदद हो सकती थी वह गांव के लोगों के लिए करती थी। गरीब बेटियों की शादी व अन्य कार्यक्रमों में उनकी मदद भी करती थी। गांव के गरीब बच्चों को अपने घर पर कुशल अध्यापकों से शिक्षा भी दिलवाती थी ताकि यह पढ़ लिख कर आगे बढ़ सकें।

गांव के विकास की सोच को लेकर चुनावी मैदान में उतरीं
महिला के पति पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर थे और उनका एक बेटा डॉक्टर और दूसरा बेटा फारेस्ट अधिकारी हैं। गांव में जो भी आदमी परेशान पीड़ित दिखता था वह उसकी मदद के लिए बराबर खड़ी रहती थी उनके मन में गांव के विकास के लिए एक सोच आई और उन्होंने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया और 7 युवा प्रत्याशियों के बीच खुद ही मैदान में कूद पड़ीं। गांव की जनता और युवाओं ने सब को नकारते हुए फूलमती के सिर पर जीत का ताज पहना दिया।

वहीं जब इस जीत के बाद फूलमती से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह गांव के विकास के लिए बराबर खड़ी रहती थी अब तो गांव के लोगों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है। अब वह गांव में हर एक वह संभव प्रयास करेंगी जो गांव में नहीं है।

वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव के बारे में और गांव के लोगों के बारे में काफी सोचती रहती हैं और जो भी संभव मदद होती है वह भी यह अपने स्तर से करती हैं शायद यही वजह रही कि गांव के लोगों ने इन्हें गांव का प्रधान चुना और अब लोगों को यह उम्मीद है कि गांव में जो विकास अब तक नहीं हुआ है वह गांव में होगा और गांव की सूरत और सीरत दोनों ही बदलेगी।

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