“Deoria 24 News” Uttar Pradesh Panchayat Election Result 2021 । BJP SP Congress BSP Purvanchal Awadh Bundelkhand | भाजपा को तगड़ा झटका, पूर्वांचल और सेंट्रल में सपा का जोर, पश्चिम में बसपा और रालोद मजबूत

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लखनऊ24 मिनट पहले

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यूपी के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा को करारा झटका लगता दिखाई दे रहा है। पूर्व से पश्चिम और अवध से बुंदेलखंड तक ज्यादातर जिलों में भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी हारते नजर आ रहे हैं। भाजपा के कई बड़े नेता अपना वर्चस्व बचाने में भी नाकाम साबित हुए। अयोध्या, काशी, मथुरा, गोरखपुर जैसे धार्मिक स्थल वाले जिलों में भी भाजपा को करारी हार मिली है।

प्रदेश में जिला पंचायत सदस्य पद के कुल 3051 सीटों पर मतदान हुआ था। 75 जिलों में चार चरणों में हुए मतदान की गिनती 829 केंद्रों पर रविवार सुबह 8 बजे से शुरू हुई थी। जो मंगलवार देर रात तक जारी थी। योगी-मोदी के गढ़ में भी भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। अब तक के जारी परिणामों के अनुसार प्रदेश में सपा नंबर वन पर दिखाई दे रही है वहीं भाजपा दूसरे नंबर पर जाती दिख रही है। तीसरे नम्बर पर बसपा और चौथे पर कांग्रेस। खास बात यह रही कि कई जिलों में निर्दलीयों ने बड़ी संख्या में भाजपा और सपा के प्रत्याशियों को भी पटखनी दी है।

हालांकि समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने दावा किया है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा जिला पंचायत सदस्य उनकी पार्टी के हैं जबकि बीजेपी प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव का कहना है कि भाजपा पर जनता का का विश्वास कायम है हम लोग ज्यादा सीट जीत चुके हैं अभी संख्या बढ़ेगी।वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता उमाशंकर पांडेय का कहना है कि सभी पार्टियों के आंकड़े झूठे हैं।

कल्याण सिंह गढ़ में 47 में 9 सीट मिली, भाजपा में शामिल पूर्व मंत्री ने सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी को हरायाकल्याण सिंह का गढ़ कहे जाने वाले अलीगढ़ जिला पंचायत के सभी 47 वार्डों पर प्रत्याशी उतारने वाली इकलौती भाजपा को जिले में कुल नौ सीटों पर जीत मिली है। पार्टी से समर्थन नहीं मिलने पर बागी हुए छह नेता बड़े अंतर से चुनाव जीते हैं, जिसमें केपी मिस्त्री की मां और पुष्पेंद्र सिंह ने जीत का रिकार्ड दर्ज कराया है।

मंत्री, सांसद और विधायक भी नहीं जिता पाए सीट

प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री के भतीजे जहां ग्राम प्रधान का चुनाव हार गये‚ वहीं गोंड़ा में भाजपा समर्थित प्रत्याशी व भाजपा के अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पीयूष मिश्रा मनकापुर चतुर्थ से सपा प्रत्याशी विजय कुमार यादव से 615 से अधिक मतों से चुनाव हार गये। लखनऊ मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर की बहू जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गई। इसी तरह पूर्व काबीना मंत्री रामबीर उपाध्याय की धर्मपत्नी सीमा उपाध्याय ने भी अपनी देवरानी और भाजपा प्रत्याशी को चुनाव हराकर बड़ी जीत दर्ज की है।

यही हाल बलिया में भाजपा के बिल्थरारोड़ क्षेत्र के विधायक धनन्जय कन्नौजिया की मां सर्यकुमारी देवी भी नगरा क्षेत्र पंचायत के वार्ड़ संख्या 19 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गई हैं। इसके अलावा भाजपा के पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर के बेटे अटल राजभर जिला पंचायत के वार्ड संख्या 24 से‚ भाजपा के गोरक्षनाथ प्रांत के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र यादव जिला पंचायत के वार्ड़ संख्या संख्या 10 से चुनाव हार गए हैं। मेरठ जिले में जिला पंचायत के चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किल हो गई है। बसपा-सपा-रालोद ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी है। 33 में से 23 सीटों पर बसपा-सपा-रालोद को बढ़त मिली है।

पूर्वांचल में भी सपा आगे रही, भाजपा को नुकसान

अखिलेश यादव संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में भाजपा समर्थित जिला पंचायत प्रत्याशी ज्योति राय को करारी हार मिली है। ज्योति पूर्व जिला अध्यक्ष विनोद राय की पुत्र वधु हैं। विनोद भाजपा के गोरखपुर प्रांत के उपाध्यक्ष हैं। यही नहीं‚ सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव भी चुनाव हार गयी हैं। वह पंचायत चुनाव के पहले सैफई परिवार से बगावत करके भाजपा में शामिल हुई थीं। भाजपा ने उन्हें टिकट दिया था‚ जिस पर वह मैनपुरी के जिला पंचायत सदस्य पद के लिए वार्ड़ संख्या-18 से चुनाव लड़ी थी। सपा समर्थित प्रत्याशी प्रमोद कुमार ने संध्या यादव को 1900 वोटों से हरा दिया। ऐसे ही नेता विपक्ष रामगोविंद चौधरी के पुत्र रंजीत चौधरी भी चुनाव हार गये हैं।

सपा परिवार से प्रधानी गई, कुलदीप सिंह सेंगर के परिवार से प्रधानी छिनी

आरक्षण के चलते सपा संस्थापक मुलायम के गांव सैफई में आजादी के बाद पहली बार प्रधान पद के लिए मतदान हुआ। इस सीट पर सपा समर्थित प्रत्याशी की जीत हुई। अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव सैफई द्वितीय से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत गए। यह अभी जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। उन्नाव के सजायाफ्ता विधायक व पूर्व भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर के घर में प्रधानी बची थी वो भी अब छिन गयी है। कुलदीप सिंह सेंगर के गांव में उनके धुर विरोधी शिशुपाल सिंह प्रधान चुने गए हैं. यानी कि अब कुलदीप सिंह के घर से सारे राजनीतिक पद समाप्त हो गए हैं।

भाजपा, सपा और अन्य दलों ने क्या-क्या किया दावा?

  • चुनाव परिणाम के नतीजों के बीच बीजेपी ने सूबे में जबरदस्त समर्थन मिलने का दावा किया है। बीजेपी का कहना है कि जिला पंचायत चुनाव में अभी तक पार्टी समर्थित 918 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। 456 उम्मीदवार आगे हैं और तमाम निर्दलीय उम्मीदवार भी पार्टी के संपर्क में है।
  • एसपी ने यह भी दावा किया कि 50 प्रतिशत से अधिक विजयी उम्मीदवार उनके समर्थन में थे। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, “अब तक घोषित 50 प्रतिशत से अधिक सीटों पर सपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। भाजपा न केवल शहरी क्षेत्रों में, बल्कि गांवों में भी शासन प्रदान करने में अपनी विफलता के लिए जमीन खो चुकी है, विशेषकर महामारी के दौरान इसे और उजागर किया गया है। “
  • कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने हालांकि कहा, “एसपी और बीजेपी के दावे झूठे हैं। जबकि बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी, एसपी ने अपने उम्मीदवारों का ठीक से नाम भी नहीं बताया था। दोनों ही स्वतंत्र उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं।

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