Deoria Betalpur Depot Made Terminal Will Be Inaugurated In December – अमर उजाला खास: देवरिया के बैतालपुर डिपो को बनाया टर्मिनल, दिसंबर में होगा लोकार्पण


सार

अमर उजाला से बातचीत में आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक व राज्य प्रमुख उत्तर प्रदेश राज्य कार्यालय-1 ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गोरखपुर के धुरियापार स्थित कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का लोकार्पण जल्द होगा। इसके अलावा सहजनवां बॉटलिंग प्लांट से रोजाना 70 हजार गैस सिलिंडर की आपूर्ति का भी लक्ष्य रखा।

डॉ. उत्तीय भट्टाचार्य।
– फोटो : अमर उजाला।

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गोरखपुर में पराली और गोबर की पर्याप्त आपूर्ति मिली तो धुरियापार स्थित कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट (सीबीजीपी) का लोकार्पण जुलाई 2022 तक हो जाएगा। इसका इस्तेमाल सीएनजी की तरह किया जा सकेगा। दाम भी कम रहेगा। इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की 164 करोड़ रुपये की यह परियोजना जल्द पूरी होगी। बायोगैस प्लांट की स्थापना से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार की संभावना बढ़ेगी। किसानों की आय बढ़ाने में भी कारगर साबित होगा। यह कहना है आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक व राज्य प्रमुख उत्तर प्रदेश राज्य कार्यालय-1 डॉ. उत्तीय भट्टाचार्य का। डॉ. उत्तीय सोमवार को महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा के सिलसिले में गोरखपुर आए और शहर के एक होटल में अमर उजाला संवाददाता से विशेष बात की। कार्यकारी निदेशक का कहना है कि देवरिया के बैतालपुर डिपो को अब टर्मिनल बना दिया गया है। 318 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे टर्मिनल की क्षमता बढ़ गई है। इसका लोकार्पण दिसंबर में होगा। पेश है बातचीत के अंश…

देवरिया के बैतालपुर डिपो के संबंध में नई योजना है क्या?
जी हां, बैतालपुर डिपो को अब टर्मिनल बना दिया गया है। इसका लोकार्पण दिसंबर 2021 में होगा। अभी तक डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति ट्रेन के वैगन से की जाती है, लेकिन जल्द ही पूरी आपूर्ति पटना-मोतिहारी से बैतालपुर प्रोडक्ट पाइप लाइन से की जाएगी। इससे लीकेज, वैगन न मिलने सहित तमाम तरह की दिक्कतें खत्म हो जाएंगी। बैतालपुर को टर्मिनल बनाने पर 318 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। पहले चरण में 180 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं। दूसरे चरण में 130 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। सारी व्यवस्था ऑटोमेटिक रहेगी।  

टर्मिनल बनने से क्षमता भी बढ़ेगी क्या, इसका कितना फायदा ग्राहकों को मिलेगा?
आपका सवाल बहुत अच्छा है। बैतालपुर डिपो की क्षमता अभी तक 25 हजार किलोलीटर थी, जो बढ़कर 99 हजार किलोलीटर हो गई है। आपूर्ति भी बढ़ जाएगी। इस डिपो से अभी तक गोरखपुर, संतकबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर, मऊ, देवरिया व बलिया में डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति की जाती है। क्षमता बढ़ने के बाद गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती में भी आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी। गोंडा के बजाय देवरिया के बैतालपुर टर्मिनल से ही सारी आपूर्ति कराई जाएगी। व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए 221 की जगह 313 टैंकर लगाए जा रहे हैं।

गोरखपुर के धुरियापार का कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट कब तक बन जाएगा?
250 करोड़ की लागत से बनने वाला प्लांट जल्द तैयार होगा। अब जरूरत पराली और गोबर की सप्लाई चेन बनाने की है। इस मुहिम में कंपनी जुटी है। राज्य सरकार से सहयोग मांगा गया है। कचरे से कंचन बनाने का सपना जल्द साकार होगा। यह प्रोजेक्ट प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार बढ़ाएगा। किसानों की आय बढ़ाने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होगा। जो पराली अभी जला दी जाती है, वह अच्छे दाम पर बेची जा सकेगी। किसान आसानी से पराली, गोबर बेच सकें, इसके लिए बायोमास सेंटर बनाए जा रहे हैं। बायोगैस सस्ती मिलेगी। कंपनी के पंप से बायोगैस भरवाई जा सकेगी। सब कुछ ठीक रहा तो जुलाई 2022 तक बायोगैस प्लांट का लोकार्पण कराया जा सकता है।

गोरखपुर के धुरियापार में एथेनॉल प्लांट का निर्माण 800 करोड़ रुपये से कराया जा रहा है। गन्ना, पराली व गोबर से एथेनॉल बनाया जाना है। यह परियोजना भी किसानों के लिए सौगात लेकर आएगी। आय बढ़ाने में मददगार साबित होगी। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार बढ़ जाएगा।

सहजनवां के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की क्षमता बढ़ाई जा रही है क्या?
गोरखपुर में एलपीजी का सबसे खास बॉटलिंग प्लांट बना है। इसकी क्षमता 48 प्वाइंट 2 कैरोजल है। यह दो प्लांट के बराबर है। प्रति मिनट में 96 गैस सिलिंडर भरे जा सकते हैं। रोजाना 28 हजार गैस सिलिंडर भरने की क्षमता है, लेकिन इस वक्त 35 हजार सिलिंडर भरे जा रहे हैं। एक शिफ्ट में रोजाना 40-45 हजार गैस सिलिंडर की आपूर्ति का लक्ष्य है। अगर दो शिफ्ट में काम किया जाए तो रोजाना 70 हजार गैस सिलिंडर भरे जा सकते हैं।

कंपोजिट सिलिंडर की क्या खासियत है, किस तरह से सुरक्षित है?
यह सिलिंडर पारदर्शी व फाइबर युक्त है। स्टील सिलिंडर से 50 फीसदी हल्का है। जंग नहीं लगेगा। ब्लास्ट प्रूफ है। विस्फोट की गुंजाइश नहीं रहेगी। पारदर्शी होने की वजह से गैस की मात्रा का आसानी से पता चल सकेगा। कंपोजिट सिलिंडर पांच व दस किलोग्राम में आता है। एलपीजी गैस की कीमत एक जैसी है। कंपोजिट सिलिंडर की रिफंडेबल सिक्योरिटी कुछ ज्यादा जमा कराई जाती है। हालांकि यह धनराशि सुरक्षित रहती है। जब चाहे, उपभोक्ता इसे वापस ले सकते हैं। गोरखपुर में 25 से ज्यादा उपभोक्ता विश्वस्तरीय नई तकनीकी व मेक इन इंडिया का कंपोजिट सिलिंडर इस्तेमाल कर रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं के पास सामान्य सिलिंडर है, वह बदलकर कंपोजिट सिलिंडर ले सकते हैं। गैस भराने के बाद दस किलोग्राम का सिलिंडर 660 रुपये में मिलेगा।  

 

बिल्कुल। कंप्रेस्ड बायोगैस व एथेनॉल प्लांट का निर्माण इसी दिशा में उठाया गया कदम है। बैतालपुर टर्मिनल में वेपर रिकवरी सिस्टम (वीआरएस) लगाया गया है। यह हवा में घुलने वाले वेपर को सोख लेगा, फिर पाइप के जरिए टैंकर तक भेजेगा। पंपों पर भी वीआरएस लगवाए जा रहे हैं। जो टैंकर अभी तक ऊपर से भरे जाते थे, उसे टैंकर के निचले हिस्से से भरने की व्यवस्था बनाई जा रही है। इससे भी पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सकेगा। डीजल-पेट्रोल की गुणवत्ता बढ़ाकर कार्बन मोनो ऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा कम की जा रही है।

सहजनवां बॉटलिंग प्लांट में बाढ़ का पानी घुस गया था, किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा था?
नुकसान का न पूछिए। यह सोचिए कि आईओसीएल फैमिली ने कठिन चुनौती के बीच कितनी दृढ़ इच्छा शक्ति व ईमानदारी से काम किया। एक सितंबर को प्लांट में बाढ़ का पानी घुसा था। 15 सितंबर तक प्लांट बंद रहा। ऐसे में गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलिया और मऊ में पर्याप्त गैस सिलिंडर आपूर्ति की चुनौती थी। उपभोक्ता सुविधा को ध्यान में रखकर ही अभियान छेड़ा गया। वाराणसी व लखनऊ से 15 दिन के अंदर ही चार लाख तिरासी हजार गैस सिलिंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। सहजनवां से जुड़े इन जिलों में प्रतिमाह नौ लाख 40 हजार गैस सिलिंडर की आपूर्ति की जाती है। बाढ़ के दौरान दिन-रात काम किया गया। गोरखपुर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर सहित अन्य जिलों के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में 108 किलोलीटर केरोसिन की आपूर्ति रातोंरात सुनिश्चित कराई गई। यह स्थिति तब रही, जबकि यूपी में केरोसिन की आपूर्ति पर लंबे समय से प्रतिबंधित था।

विस्तार

गोरखपुर में पराली और गोबर की पर्याप्त आपूर्ति मिली तो धुरियापार स्थित कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट (सीबीजीपी) का लोकार्पण जुलाई 2022 तक हो जाएगा। इसका इस्तेमाल सीएनजी की तरह किया जा सकेगा। दाम भी कम रहेगा। इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की 164 करोड़ रुपये की यह परियोजना जल्द पूरी होगी। बायोगैस प्लांट की स्थापना से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार की संभावना बढ़ेगी। किसानों की आय बढ़ाने में भी कारगर साबित होगा। यह कहना है आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक व राज्य प्रमुख उत्तर प्रदेश राज्य कार्यालय-1 डॉ. उत्तीय भट्टाचार्य का। डॉ. उत्तीय सोमवार को महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा के सिलसिले में गोरखपुर आए और शहर के एक होटल में अमर उजाला संवाददाता से विशेष बात की। कार्यकारी निदेशक का कहना है कि देवरिया के बैतालपुर डिपो को अब टर्मिनल बना दिया गया है। 318 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे टर्मिनल की क्षमता बढ़ गई है। इसका लोकार्पण दिसंबर में होगा। पेश है बातचीत के अंश…

देवरिया के बैतालपुर डिपो के संबंध में नई योजना है क्या?

जी हां, बैतालपुर डिपो को अब टर्मिनल बना दिया गया है। इसका लोकार्पण दिसंबर 2021 में होगा। अभी तक डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति ट्रेन के वैगन से की जाती है, लेकिन जल्द ही पूरी आपूर्ति पटना-मोतिहारी से बैतालपुर प्रोडक्ट पाइप लाइन से की जाएगी। इससे लीकेज, वैगन न मिलने सहित तमाम तरह की दिक्कतें खत्म हो जाएंगी। बैतालपुर को टर्मिनल बनाने पर 318 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। पहले चरण में 180 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं। दूसरे चरण में 130 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। सारी व्यवस्था ऑटोमेटिक रहेगी।  

टर्मिनल बनने से क्षमता भी बढ़ेगी क्या, इसका कितना फायदा ग्राहकों को मिलेगा?

आपका सवाल बहुत अच्छा है। बैतालपुर डिपो की क्षमता अभी तक 25 हजार किलोलीटर थी, जो बढ़कर 99 हजार किलोलीटर हो गई है। आपूर्ति भी बढ़ जाएगी। इस डिपो से अभी तक गोरखपुर, संतकबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर, मऊ, देवरिया व बलिया में डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति की जाती है। क्षमता बढ़ने के बाद गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती में भी आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी। गोंडा के बजाय देवरिया के बैतालपुर टर्मिनल से ही सारी आपूर्ति कराई जाएगी। व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए 221 की जगह 313 टैंकर लगाए जा रहे हैं।

गोरखपुर के धुरियापार का कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट कब तक बन जाएगा?

250 करोड़ की लागत से बनने वाला प्लांट जल्द तैयार होगा। अब जरूरत पराली और गोबर की सप्लाई चेन बनाने की है। इस मुहिम में कंपनी जुटी है। राज्य सरकार से सहयोग मांगा गया है। कचरे से कंचन बनाने का सपना जल्द साकार होगा। यह प्रोजेक्ट प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार बढ़ाएगा। किसानों की आय बढ़ाने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होगा। जो पराली अभी जला दी जाती है, वह अच्छे दाम पर बेची जा सकेगी। किसान आसानी से पराली, गोबर बेच सकें, इसके लिए बायोमास सेंटर बनाए जा रहे हैं। बायोगैस सस्ती मिलेगी। कंपनी के पंप से बायोगैस भरवाई जा सकेगी। सब कुछ ठीक रहा तो जुलाई 2022 तक बायोगैस प्लांट का लोकार्पण कराया जा सकता है।

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