Dhan Teras In Dhata Mahayougik Yoga – धाता नामक महाऔदायिक योग में मनेगी धनतेरस


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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मंगलवार को कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी में वैधृति योग, गर करण और धाता नामक महा औदायिक योग में धनतेरस एवं धन्वंतरि जयंती मनाई जाएगी। इस दिन सूर्यादय 6.28 बजे एवं द्वादशी तिथि का मान प्रात: 8.35 बजे तक, इसके बाद पुन:संपूर्ण दिन और रात्रि पर्यंत त्रयोदशी तिथि दूसरे दिन सुबह 7.14 बजे तक रहेगी।
दो नवंबर को प्रदोष व्रत भी है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसी दिन से दीपावली का महापर्व आरंभ माना जाता है। यह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाने वाला पर्व है। यह मुख्य दो रूपों में मनाया जाने वाला पर्व है। प्रथम धनवंतरि जयंती एवं दूसरा धनतेरस के रूप में। ज्योतिषाचार्य आचार्य धनंजय पांडेय, पं.शरदचंद मिश्र व आचार्य पं.विवेकानंद पांडेय ने बताया कि देव और असुरों द्वारा सम्मिलित रूप में किए गए समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था। इस दिन धातु के बने बर्तनों को खरीदना आगामी वर्ष के लिए समृद्धिदायक माना जाता है।
खरीदारी का यह है शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार, को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रात: 9.56 बजे तक के बाद संपूर्ण दिन और रात्रि पर्यंत हस्त नक्षत्र है। कन्या राशि पर चंद्रमा की स्थिति रहेगा। राशि स्वामी बुध ग्रह होने से व्यापार से जुड़े लोगों के लिए धनतेरस अत्यंत शुभ रहेगा। खरीदारी के लिए दिन में दिन में 10.14 से 11.37 बजे तक चर बेला सामान्यत: शुभद, 11.38 बजे 12 बजे लाभ बेला अत्यंत उत्तम एवं प्रशस्त है। दिन में 2.46 से 4.18 बजे तक शौभ बेला उत्तम, शाम 5.32 बजे से प्रदोष काल 7.46 बजे सर्वोत्तम, रात में 8.46 से 10.23 बजे चर बेला सामान्यत: शुभद, रात में 10.24 से 12 बजे रात तक लाभ बेला अत्यंत उत्तम, रात में 12 से 1.37 बजे अमृत बेला पूर्ण उत्तम, रात में 3.14 से 4.51बजे तक शुभ बेला अति शुभ एवं उत्तम रहेगी।

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देवरिया। मंगलवार को कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी में वैधृति योग, गर करण और धाता नामक महा औदायिक योग में धनतेरस एवं धन्वंतरि जयंती मनाई जाएगी। इस दिन सूर्यादय 6.28 बजे एवं द्वादशी तिथि का मान प्रात: 8.35 बजे तक, इसके बाद पुन:संपूर्ण दिन और रात्रि पर्यंत त्रयोदशी तिथि दूसरे दिन सुबह 7.14 बजे तक रहेगी।

दो नवंबर को प्रदोष व्रत भी है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसी दिन से दीपावली का महापर्व आरंभ माना जाता है। यह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाने वाला पर्व है। यह मुख्य दो रूपों में मनाया जाने वाला पर्व है। प्रथम धनवंतरि जयंती एवं दूसरा धनतेरस के रूप में। ज्योतिषाचार्य आचार्य धनंजय पांडेय, पं.शरदचंद मिश्र व आचार्य पं.विवेकानंद पांडेय ने बताया कि देव और असुरों द्वारा सम्मिलित रूप में किए गए समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था। इस दिन धातु के बने बर्तनों को खरीदना आगामी वर्ष के लिए समृद्धिदायक माना जाता है।

खरीदारी का यह है शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार, को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रात: 9.56 बजे तक के बाद संपूर्ण दिन और रात्रि पर्यंत हस्त नक्षत्र है। कन्या राशि पर चंद्रमा की स्थिति रहेगा। राशि स्वामी बुध ग्रह होने से व्यापार से जुड़े लोगों के लिए धनतेरस अत्यंत शुभ रहेगा। खरीदारी के लिए दिन में दिन में 10.14 से 11.37 बजे तक चर बेला सामान्यत: शुभद, 11.38 बजे 12 बजे लाभ बेला अत्यंत उत्तम एवं प्रशस्त है। दिन में 2.46 से 4.18 बजे तक शौभ बेला उत्तम, शाम 5.32 बजे से प्रदोष काल 7.46 बजे सर्वोत्तम, रात में 8.46 से 10.23 बजे चर बेला सामान्यत: शुभद, रात में 10.24 से 12 बजे रात तक लाभ बेला अत्यंत उत्तम, रात में 12 से 1.37 बजे अमृत बेला पूर्ण उत्तम, रात में 3.14 से 4.51बजे तक शुभ बेला अति शुभ एवं उत्तम रहेगी।

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