Kisan Sabha Meeting – किसान विरोधी हैं केंद्र सरकार की नीतियां : पी कृष्ण प्रसाद


धनौती ढ़ाला पर सभा को संबोधित करते किसान महा सभा के कार्यकर्ता
– फोटो : SALEMPUR

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किसान विरोधी हैं केंद्र सरकार की नीतियां : पी कृष्ण प्रसाद
ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय वित्त सचिव ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
संवाद न्यूज एजेंसी
भाटपाररानी। ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय वित्त सचिव एवं केरल के पूर्व विधायक पी कृष्ण प्रसाद ने कहा है कि केंद्र की सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है। एक तरफ काला कृषि कानून लाकर किसानों को निहत्था बना रही है, दूसरी तरफ उसके मंत्री किसानों की हत्या कर रहे हैं। वह बुधवार को भाटपाररानी नगर में केपी सिंह के आवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि लखीमपुर की घटना हादसा नहीं हत्या है। इसके बाद भी केंद्र सरकार अपने मंत्री को बचा रही है और इसपर पर्दा डाल रही है। इसका जवाब जनता समय आने पर पीएम को देगी। उन्होंने कृषि कानून को काला कानून बताते हुए कहा कि इससे अनाज की मंडी कंपनी की हो जाएगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गन्ना गन्ना मूल्य भुगतान की चर्चा करते हुए कहा कि सात वर्ष पूर्व बकाया गन्ना मूल्य 9700 करोड़ रुपये था, जो अब 20 हजार करोड़ हो गया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नफरत की राजनीति फैलाकर सत्ता में बने रहना चाहती है। समय आने पर देश और प्रदेश की जनता इसका करारा जवाब देने के लिए तैयार बैठी है। बाद में उन्होंने क्षेत्र के बांगरुआ और हरे राम चौराहे पर किसान महापंचायत को भी संबोधित किया और कृषि कानून को काला कानून बताते हुए लोगों से 22 नवंबर को लखनऊ पहुंचने की अपील की।

किसान विरोधी हैं केंद्र सरकार की नीतियां : पी कृष्ण प्रसाद

ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय वित्त सचिव ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

संवाद न्यूज एजेंसी

भाटपाररानी। ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय वित्त सचिव एवं केरल के पूर्व विधायक पी कृष्ण प्रसाद ने कहा है कि केंद्र की सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है। एक तरफ काला कृषि कानून लाकर किसानों को निहत्था बना रही है, दूसरी तरफ उसके मंत्री किसानों की हत्या कर रहे हैं। वह बुधवार को भाटपाररानी नगर में केपी सिंह के आवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि लखीमपुर की घटना हादसा नहीं हत्या है। इसके बाद भी केंद्र सरकार अपने मंत्री को बचा रही है और इसपर पर्दा डाल रही है। इसका जवाब जनता समय आने पर पीएम को देगी। उन्होंने कृषि कानून को काला कानून बताते हुए कहा कि इससे अनाज की मंडी कंपनी की हो जाएगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गन्ना गन्ना मूल्य भुगतान की चर्चा करते हुए कहा कि सात वर्ष पूर्व बकाया गन्ना मूल्य 9700 करोड़ रुपये था, जो अब 20 हजार करोड़ हो गया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा नफरत की राजनीति फैलाकर सत्ता में बने रहना चाहती है। समय आने पर देश और प्रदेश की जनता इसका करारा जवाब देने के लिए तैयार बैठी है। बाद में उन्होंने क्षेत्र के बांगरुआ और हरे राम चौराहे पर किसान महापंचायत को भी संबोधित किया और कृषि कानून को काला कानून बताते हुए लोगों से 22 नवंबर को लखनऊ पहुंचने की अपील की।

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