No Any Child Found In Aaganbadi Center – रजिस्टर में दर्ज हैं ढेरों बच्चे, उपस्थिति मिली शून्य


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पथरदेवा ब्लॉक के कई आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिले, जो खुले थे वहां बच्चे नहीं थे
संवाद न्यूज एजेंसी
बघौचघाट। सरकार की मंशा आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की है। इसके लिए प्रशिक्षण के लेकर तमाम कवायद की जा रही है। बावजूद इसके लिए धरातल पर हकीकत एकदम उलट है। कई केंद्र खुलते ही नहीं। खुलते भी तब हैं जब सामान का वितरण करना हो। यही हाल सोमवार को संवाद प्रतिनिधि की पड़ताल में पथरदेवा ब्लॉक के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर देखने को मिला। यहां रजिस्टर में ढेरों बच्चों के नाम दर्ज हैं, लेकिन उपस्थिति शून्य है।
सुबह 10 बजे मुरार छापर गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर न तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहुंची थी न ही बच्चे। सहायिका रंभा देवी कुछ देर बाद पहुंची और कहा कि हम लोगों का अपना भवन नहीं बना है। प्राथमिक विद्यालय में ही केंद्र चलता है। 10.10 बजे पहुंची कार्यकर्ता शुगंति देवी ने बताया की 35 बच्चों का नामांकन हैं पूछने पर बच्चे कहा हैं, बता नहीं र्पाइं। घुडी कुंड खुर्द में दो केंद्र एक ही भवन में चलते है। 10.25 बजे एक केंद्र पर ताला बंद था। साढ़े दस बजे एक कार्यकर्ता आशा शर्मा किसी की सूचना पर पहुंची लेकिन बच्चे नहीं थे। सहायिका का भी पता नहीं था। यहां एक केंद्र पर 28 तो दूसरे पर 30 बच्चों का नामांकन हैं। 10:45 बजे घुडी कुंड कला के दोनों केंद्रों पर ताला लटक रहा था। ग्रामीणों ने बताया की प्रथम केंद्र का ताला कभी नहीं खुलता। दूसरा केंद्र जो प्राथमिक विद्यालय के पास चलता है वह कभी कभी खुल जाता है। 11:25 बजे आंगनवाड़ी केंद्र नोनियापट्टी में ताला लटक रहा था। मोतीपुर में 11.50 बजे दो केंद्रों को सिर्फ एक सहायिका चला रही थी। दोनो कार्यकर्ता यहां नहीं थीं। 1:45 बजे आंगनबाड़ी केंद्र धूस देवरिया में कार्यकर्ता व सहायिका उपस्थित मिलीं लेकिन बच्चे नहीं थे। यहां 36 बच्चों का नामांकन है।
आंगनबाड़ी केंद्रों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। केंद्र खोलने के लिए सबको कहा गया है। जांच कराकर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
– सुषमा दुबे, सीडीपीओ, पथरदेवा

पथरदेवा ब्लॉक के कई आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिले, जो खुले थे वहां बच्चे नहीं थे

संवाद न्यूज एजेंसी

बघौचघाट। सरकार की मंशा आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की है। इसके लिए प्रशिक्षण के लेकर तमाम कवायद की जा रही है। बावजूद इसके लिए धरातल पर हकीकत एकदम उलट है। कई केंद्र खुलते ही नहीं। खुलते भी तब हैं जब सामान का वितरण करना हो। यही हाल सोमवार को संवाद प्रतिनिधि की पड़ताल में पथरदेवा ब्लॉक के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर देखने को मिला। यहां रजिस्टर में ढेरों बच्चों के नाम दर्ज हैं, लेकिन उपस्थिति शून्य है।

सुबह 10 बजे मुरार छापर गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर न तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहुंची थी न ही बच्चे। सहायिका रंभा देवी कुछ देर बाद पहुंची और कहा कि हम लोगों का अपना भवन नहीं बना है। प्राथमिक विद्यालय में ही केंद्र चलता है। 10.10 बजे पहुंची कार्यकर्ता शुगंति देवी ने बताया की 35 बच्चों का नामांकन हैं पूछने पर बच्चे कहा हैं, बता नहीं र्पाइं। घुडी कुंड खुर्द में दो केंद्र एक ही भवन में चलते है। 10.25 बजे एक केंद्र पर ताला बंद था। साढ़े दस बजे एक कार्यकर्ता आशा शर्मा किसी की सूचना पर पहुंची लेकिन बच्चे नहीं थे। सहायिका का भी पता नहीं था। यहां एक केंद्र पर 28 तो दूसरे पर 30 बच्चों का नामांकन हैं। 10:45 बजे घुडी कुंड कला के दोनों केंद्रों पर ताला लटक रहा था। ग्रामीणों ने बताया की प्रथम केंद्र का ताला कभी नहीं खुलता। दूसरा केंद्र जो प्राथमिक विद्यालय के पास चलता है वह कभी कभी खुल जाता है। 11:25 बजे आंगनवाड़ी केंद्र नोनियापट्टी में ताला लटक रहा था। मोतीपुर में 11.50 बजे दो केंद्रों को सिर्फ एक सहायिका चला रही थी। दोनो कार्यकर्ता यहां नहीं थीं। 1:45 बजे आंगनबाड़ी केंद्र धूस देवरिया में कार्यकर्ता व सहायिका उपस्थित मिलीं लेकिन बच्चे नहीं थे। यहां 36 बच्चों का नामांकन है।

आंगनबाड़ी केंद्रों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। केंद्र खोलने के लिए सबको कहा गया है। जांच कराकर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

– सुषमा दुबे, सीडीपीओ, पथरदेवा

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