Sepration Unit – अस्पताल में स्थापित होगी सेपरेशन यूनिट, मरीजों को मिलेेगी सुविधा


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अस्पताल में स्थापित होगी सेपरेशन यूनिट, मरीजों को मिलेेगी सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला अस्पताल में मरीजों की सहूलियत के लिए सेपरेशन यूनिट स्थापित करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए भवन निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। यूनिट स्थापित होने से मरीजों को प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। अस्पताल के मरीजों को यह सुविधा निशुल्क होगी। वहीं निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए शुल्क लिया जाएगा। सब ठीक रहा तो यूनिट डेढ़ से दो माह के अंदर कार्य करना शुरू कर देगी।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से लोग इलाज कराने आते हैं। मरीजों की सुविधा के लिए ब्लड बैंक की स्थापना की गई है। यहां प्रतिदिन औसतन दस से पंद्रह यूनिट ब्लड की खपत है। ब्लड बैंक से मरीजों के लिए पूरा रक्त उपलब्ध कराया जाता है, पीआरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आदि की सुविधा नहीं है। तीमारदारों को निजी ब्लड बैंक से व्यवस्था करनी पड़ती है, इसके अधिक धन खर्च करना पड़ता है। वहां भी हर समय पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं रहा है। ऐसे में गंभीर रूप से झुलसे, दुर्घटना के शिकार मरीजों को इलाज कराने के लिए रेफर कर दिया गया है। वहीं बड़ा आपरेशन करने में भी परेशानी होती है। इन दिक्कतों को गंभीरता से लेते हुए ब्लड बैंक के बगल में सेपरेशन यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। जमीन चिह्नित कर एनएचएम द्वारा निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया गया है।
प्लेटलेट्स कम होने पर गोरखपुर रेफर कर दिए जाते हैं मरीज
देवरिया। जिला अस्पताल में प्लेटलेट्स उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में डेंगू के मरीज को भर्ती कर इलाज किया जाता है, लेकिन प्लेटलेट्स कम होने पर उसे चढ़ाने की जरूरत होती है। यहां आसानी से उपलब्ध न होने के कारण ऐसी स्थिति में मरीजों को गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। इसी तरह प्लाज्मा, पीआरबीसी, क्लाटिंग फैक्टर भी अस्पताल में उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को रेफर कर दिया जाता है तो कुछ को मजबूरन निजी अस्पताल जाना पड़ता है। यूनिट के शुरू हो जाने से मेडिकल कॉलेज में बर्न, दुर्घटना में घायल सहित अन्य गंभीर मरीजों को आसानी से जरूरत के मुताबिक ब्लड उपलब्ध हो सकेगा वहीं बड़े आपरेशन भी करने में सहूलियत होगी।
पंद्रह लाख की लागत से बन रहा भवन
पंद्रह लाख की लागत से बनने वाले इस यूनिट में तीन गुणा तीन मीटर के दो और छह गुणा छह मीटर का एक हॉल बनाया जाएगा। भवन का निर्माण कार्य एक से डेढ़ माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद मशीनों के स्टाल करने का कार्य होगा।
प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी के लिए नहीं पड़ेगा भटकना
सेपरेशन यूनिट के लिए भवन निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद होल ब्लड से पीआरबीसी, प्लेटलेट, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा निकालने की मशीन व अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। होल ब्लड से चार घंटे के अंदर प्लाज्मा, पीआरबीसी, प्लेटलेट्स आदि तैयार किए जाते हैं। इन्हें अलग-अलग तापमान में रखा जाता है। सुरक्षित रखने के लिए व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए डी फ्रीजर, ब्लड रेफ्रिजरेटर, प्लेटलेट्स एरिटेटर लगाए जाएंगे।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के ब्लड के बगल में सेपरेशन यूनिट स्थापित करने की योजना है। इसका निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसके पूरा होने के बाद संबंधित कंपनी द्वारा मशीनों और उपकरण को लगा दिया जाएगा। यूनिट शुरू होने से मरीजों को लाभ होगा। उन्हें प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, पीआरबीसी आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।
– डॉ. अकील अहमद, प्रभारी ब्लड बैंक

अस्पताल में स्थापित होगी सेपरेशन यूनिट, मरीजों को मिलेेगी सुविधा

संवाद न्यूज एजेंसी

देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला अस्पताल में मरीजों की सहूलियत के लिए सेपरेशन यूनिट स्थापित करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए भवन निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। यूनिट स्थापित होने से मरीजों को प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। अस्पताल के मरीजों को यह सुविधा निशुल्क होगी। वहीं निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए शुल्क लिया जाएगा। सब ठीक रहा तो यूनिट डेढ़ से दो माह के अंदर कार्य करना शुरू कर देगी।

मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से लोग इलाज कराने आते हैं। मरीजों की सुविधा के लिए ब्लड बैंक की स्थापना की गई है। यहां प्रतिदिन औसतन दस से पंद्रह यूनिट ब्लड की खपत है। ब्लड बैंक से मरीजों के लिए पूरा रक्त उपलब्ध कराया जाता है, पीआरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आदि की सुविधा नहीं है। तीमारदारों को निजी ब्लड बैंक से व्यवस्था करनी पड़ती है, इसके अधिक धन खर्च करना पड़ता है। वहां भी हर समय पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं रहा है। ऐसे में गंभीर रूप से झुलसे, दुर्घटना के शिकार मरीजों को इलाज कराने के लिए रेफर कर दिया गया है। वहीं बड़ा आपरेशन करने में भी परेशानी होती है। इन दिक्कतों को गंभीरता से लेते हुए ब्लड बैंक के बगल में सेपरेशन यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। जमीन चिह्नित कर एनएचएम द्वारा निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया गया है।

प्लेटलेट्स कम होने पर गोरखपुर रेफर कर दिए जाते हैं मरीज

देवरिया। जिला अस्पताल में प्लेटलेट्स उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में डेंगू के मरीज को भर्ती कर इलाज किया जाता है, लेकिन प्लेटलेट्स कम होने पर उसे चढ़ाने की जरूरत होती है। यहां आसानी से उपलब्ध न होने के कारण ऐसी स्थिति में मरीजों को गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। इसी तरह प्लाज्मा, पीआरबीसी, क्लाटिंग फैक्टर भी अस्पताल में उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को रेफर कर दिया जाता है तो कुछ को मजबूरन निजी अस्पताल जाना पड़ता है। यूनिट के शुरू हो जाने से मेडिकल कॉलेज में बर्न, दुर्घटना में घायल सहित अन्य गंभीर मरीजों को आसानी से जरूरत के मुताबिक ब्लड उपलब्ध हो सकेगा वहीं बड़े आपरेशन भी करने में सहूलियत होगी।

पंद्रह लाख की लागत से बन रहा भवन

पंद्रह लाख की लागत से बनने वाले इस यूनिट में तीन गुणा तीन मीटर के दो और छह गुणा छह मीटर का एक हॉल बनाया जाएगा। भवन का निर्माण कार्य एक से डेढ़ माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद मशीनों के स्टाल करने का कार्य होगा।

प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी के लिए नहीं पड़ेगा भटकना

सेपरेशन यूनिट के लिए भवन निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद होल ब्लड से पीआरबीसी, प्लेटलेट, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा निकालने की मशीन व अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। होल ब्लड से चार घंटे के अंदर प्लाज्मा, पीआरबीसी, प्लेटलेट्स आदि तैयार किए जाते हैं। इन्हें अलग-अलग तापमान में रखा जाता है। सुरक्षित रखने के लिए व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए डी फ्रीजर, ब्लड रेफ्रिजरेटर, प्लेटलेट्स एरिटेटर लगाए जाएंगे।

मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के ब्लड के बगल में सेपरेशन यूनिट स्थापित करने की योजना है। इसका निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसके पूरा होने के बाद संबंधित कंपनी द्वारा मशीनों और उपकरण को लगा दिया जाएगा। यूनिट शुरू होने से मरीजों को लाभ होगा। उन्हें प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, पीआरबीसी आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।

– डॉ. अकील अहमद, प्रभारी ब्लड बैंक

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