Transformer – सात माह में फुं के पांच हजार ट्रांसफॉर्मर, डेढ़ हजार में तेल मिला कम


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सात माह में फुं के पांच हजार ट्रांसफॉर्मर, डेढ़ हजार में तेल मिला कम
टीम बनाकर कराई जा रही जांच, कुछ में तेल न मिलने की भी बात सामने आई
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अप्रैल से अक्तूबर तक करीब पांच हजार ट्रांसफार्मर फुंके हैं। इसमें से डेढ़ हजार ट्रांसफॉर्मर जब वर्कशाप में आए तो तेल की कमी मिली है। सूत्रों की मानें तो कुछ में तेल न मिलने की भी बात सामने आई है। कम तेल की वजह से जले ट्रांसफार्मरों की क्वायल भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि या तो वर्कशॉप से तेल कम भरा जा रहा है या फिर बाहर से तेल की चोरी हो रही है।
जिले में करीब 20 हजार ट्रांसफार्मर से 3.60 लाख उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। जनवरी और फरवरी छोड़ दिया तो जून से अगस्त हर माह करीब 350 से 400 ट्रांसफार्मर फुंके हैं। सितंबर, अक्तूबर और 22 नवंबर तक संख्या दो सौ के पार है। भटवलिया स्थित वर्कशाप में ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत काम होता है। इसके लिए दो फर्मों को ठेका दिया गया है। तेल और सामान बिजली निगम देता है। निगम की सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो अप्रैल से अक्तूबर तक पांच हजार ट्रांसफॉर्मर जल चुके हैं। इसमें से करीब डेढ़ हजार ट्रांसफार्मर में जब वर्कशाप आए तो आधे में भी कम तेल मिला है। इसके कारण कम तेल की वजह से जले ट्रॉसफार्मरों की क्वायल क्षतिग्रस्त हो गई थी। तेल कम होने की आला अफसरों को भनक लगी तो दो टीम बना कर जांच करा कर तेल के चेकिंग की जा रही है। यहां तक की कुछ जगहों से जले हुए आए ट्रांसफार्मरों में तो एकदम तेल नहीं मिला है।
बाजार में बिक रहे ढ़ाई सौ रुपये लीटर तेल
देवरिया। ट्रांसफार्मर को तेल गर्म होने से बचाता है। निगम इस तेल को 79 रुपये लीटर खरीद कर मानक के अनुसार ट्रांसफॉर्मर में डालता है। लेकिन बाजार में इस तेज का दाम करीब ढाई सौ रुपये प्रति लीटर है। इससे वेल्डिंग सहित अन्य काम में उपयोग में लाया जाता है।
किस क्षमता के ट्रासफार्मर में कितना चहिए तेल
अलग- अलग क्षमता के अनुसार तेल भरने का मानक है। इसमें 10 केवीए में 35, 25 केवीए में 75,
63 केवीए में 140,100 केवीए में 180, 250 केवीए में 350, 400 केवीए में 410 लीटर तेल भरा जाता है।
ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद जब वापस आता है तो लीकेज की वजह से तेल कम हो जाता है। तेल मानक के अनुसार भरा जाए, इसके लिए वर्कशाप के अलावा एक टीम का गठन किया गया है, जो जांच करने के बाद ही रिपोर्ट देगी।
– जीसी यादव, अधीक्षण अभियंता

सात माह में फुं के पांच हजार ट्रांसफॉर्मर, डेढ़ हजार में तेल मिला कम

टीम बनाकर कराई जा रही जांच, कुछ में तेल न मिलने की भी बात सामने आई

संवाद न्यूज एजेंसी

देवरिया। अप्रैल से अक्तूबर तक करीब पांच हजार ट्रांसफार्मर फुंके हैं। इसमें से डेढ़ हजार ट्रांसफॉर्मर जब वर्कशाप में आए तो तेल की कमी मिली है। सूत्रों की मानें तो कुछ में तेल न मिलने की भी बात सामने आई है। कम तेल की वजह से जले ट्रांसफार्मरों की क्वायल भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि या तो वर्कशॉप से तेल कम भरा जा रहा है या फिर बाहर से तेल की चोरी हो रही है।

जिले में करीब 20 हजार ट्रांसफार्मर से 3.60 लाख उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। जनवरी और फरवरी छोड़ दिया तो जून से अगस्त हर माह करीब 350 से 400 ट्रांसफार्मर फुंके हैं। सितंबर, अक्तूबर और 22 नवंबर तक संख्या दो सौ के पार है। भटवलिया स्थित वर्कशाप में ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत काम होता है। इसके लिए दो फर्मों को ठेका दिया गया है। तेल और सामान बिजली निगम देता है। निगम की सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो अप्रैल से अक्तूबर तक पांच हजार ट्रांसफॉर्मर जल चुके हैं। इसमें से करीब डेढ़ हजार ट्रांसफार्मर में जब वर्कशाप आए तो आधे में भी कम तेल मिला है। इसके कारण कम तेल की वजह से जले ट्रॉसफार्मरों की क्वायल क्षतिग्रस्त हो गई थी। तेल कम होने की आला अफसरों को भनक लगी तो दो टीम बना कर जांच करा कर तेल के चेकिंग की जा रही है। यहां तक की कुछ जगहों से जले हुए आए ट्रांसफार्मरों में तो एकदम तेल नहीं मिला है।

बाजार में बिक रहे ढ़ाई सौ रुपये लीटर तेल

देवरिया। ट्रांसफार्मर को तेल गर्म होने से बचाता है। निगम इस तेल को 79 रुपये लीटर खरीद कर मानक के अनुसार ट्रांसफॉर्मर में डालता है। लेकिन बाजार में इस तेज का दाम करीब ढाई सौ रुपये प्रति लीटर है। इससे वेल्डिंग सहित अन्य काम में उपयोग में लाया जाता है।

किस क्षमता के ट्रासफार्मर में कितना चहिए तेल

अलग- अलग क्षमता के अनुसार तेल भरने का मानक है। इसमें 10 केवीए में 35, 25 केवीए में 75,

63 केवीए में 140,100 केवीए में 180, 250 केवीए में 350, 400 केवीए में 410 लीटर तेल भरा जाता है।

ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद जब वापस आता है तो लीकेज की वजह से तेल कम हो जाता है। तेल मानक के अनुसार भरा जाए, इसके लिए वर्कशाप के अलावा एक टीम का गठन किया गया है, जो जांच करने के बाद ही रिपोर्ट देगी।

– जीसी यादव, अधीक्षण अभियंता

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